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26/11 हमले के वक्त के हीरो को लॉकडाउन में फुटपाथ पर सोता देख लोग सन्न रह गए!

हरिश्चंद्र श्रीवर्धनकर. 26/11 के आतंकी हमले में कसाब को पहचानने वाले शख्स. उसी आतंकी हमले में दो गोलियां खाने वाले हरिश्चंद्र, 29 अप्रैल को मुंबई के सात रास्ता इलाके में फुटपाथ पर पाए गए. लगभग 60 साल के हरिश्चंद्र, डेन डिसूजा नाम के एक व्यक्ति के दुकान के पास पड़े हुए थे. डिसूजा और उनके दोस्तों ने हरिश्चंद्र को उनके घर पर छोड़ा.

कौन हैं हरिश्चंद्र श्रीवर्धनकर

हरिश्चंद्र सरकारी कर्मचारी हैं. मुंबई में 26/11 के हमले में इन्हें पीठ पर दो गोलियां लगी थीं. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वे 26/11 के हमले के गवाह भी थे.

हरिश्चंद्र ने स्पेशल कोर्ट के सामने अफजल को पहचाना था और उसके खिलाफ गवाही दी थी. वे कसाब और उसके साथी अबू इस्माइल की गोलियों से चोटिल भी हुए थे. उन्होंने इस्माइल को अपने ऑफिस बैग से मारा भी था.

हरिश्चंद्र को अपनी दुकान के बाहर देखने वाले डिसूजा ने कहा-

मैंने इन्हें अपनी दुकान के बाहर देखा. जब बात करने की कोशिश की, तो वे कुछ शब्द ही बोल पाए. वो ‘हरिश्चंद्र’, ‘ बीएमसी’ और ‘महालक्ष्मी’ बोल सके. हमने जब उन्हें कुछ खाने को दिया, वो उसे खा भी नहीं पाए. हमने फिर इसी आधार पर इनके परिवार को खोजना शुरू किया.

डिसूजा के स्कूल के दोस्त और बेसहारा लोगों के लिए ‘आईएमसी केयर’ नाम की संस्था चलाने वाले टिमोथी गायकवाड़ ने बताया-

काफी मेहनत के बाद डिसूजा ने हरिश्चंद्र के भाई को खोजा, जो महालक्ष्मी में रहते हैं. डिसूजा ने 26/11 की न्यूज रिपोर्ट की मदद से भाई का पता लगाया. एक शख्स, जिसकी एक समय सब तारीफ करते थे, आज हेल्पलेस है.

टिमोथी गायकवाड़ लगातार मुंबई पुलिस के संपर्क में थे. उनकी मदद से हरिश्चंद्र को उनके परिवार से मिलवाया जा सका. हरिश्चंद्र का परिवार कल्याण में रहता है. घर वालों ने दो महीने पहले उनके गुमशुदा होने की रिपोर्ट स्थानीय थाने में लिखवाई थी.

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक खबर के मुताबिक, गामदेवी पुलिस स्टेशन के पीआर ऑफिसर महेश शिंदे ने कहा-

आजकल हम पर वर्कलोड काफी ज्यादा है, लेकिन फिर भी इनकी मदद करना हमारी ड्यूटी थी. इनकी मदद करने में कई टीमों के को-आर्डिनेशन और मदद की जरूरत पड़ी.

डिसूजा के स्कूल के दोस्त टिमोथी गायकवाड़ ने बताया-

हरिश्चंद्र को उनके भाई के यहां छोड़ने के वक्त चार या पांच कारें मंगाई गईं. पुलिस ने उनके बेटे के लिए स्पेशल पास की व्यवस्था की.

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की 2010 में छपी खबर के मुताबिक, हरिश्चंद्र इतने करीब से एनकाउंटर को देखने के बाद काफी दिनों तक ठीक से बोल नहीं पाते थे.

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