और जरूरी कारगर साबित होता एनपीआर यदि कामगारों का डिजिटल रिकॉर्ड सरकार के पास होता

और जरूरी कारगर साबित होता एनपीआर यदि कामगारों का डिजिटल रिकॉर्ड सरकार के पास होता
जो लोग मोदी सरकार की जनधन बैंक खाते, राशन कार्डों को आधार संख्या से जोड़ने, प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण जैसी योजनाओं का निजता के हनन के नाम पर विरोध कर रहे थे उन्हें आज यह बताना चाहिए कि यदि ये उपाय न किए गए होते तो कोरोना आपदा के समय करोड़ों लोगों के बैंक खातों तक तुरंत मदद कैसे पहुंच पाती? कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 21 दिन के लॉकडाउन के बाद एक ओर जहां महानगरों से कामगारों का पलायन शुरू हो गया तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल 27.50 लाख मनरेगा श्रमिकों के खातों में 611 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित कर दी।
केंद्र सरकार के पैकेज से मिला गरीब महिलाओं, बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों को राहत
इसी तरह केंद्र सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की जिसमें राशन कार्ड धारकों, उज्ज्वला लाभार्थियों, महिला जनधन खाता धारकों, बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों, किसानों को त्वरित राहत पहुंचाई गई। इससे देश की बहुसंख्यक आबादी लॉकडाउन के दुष्प्रभावों से बच गई और उनमें महानगरों के कामगारों की भांति अफरातफरी नहीं मची।
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