ये कैसा कलयुगी बेटा, माता-पिता को मारने के बाद भी करता रहा वार, पकड़े जाने पर हंसता रहा

सांपला [अजय रोहज] पाकस्मा गांव में कलयुगी बेटे ने जिस तरीके से माता-पिता की बेरहमी से हत्या की है उससे हर कोई हैरान है। जन्म देने वाले माता-पिता को लेकर आरोपित में कितना जहर भरा हुआ था यह दोनों शवों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था। आरोपित ने सोते समय दोनों को मौत के घाट उतारा और फिर ट्रैक्टर में लेकर करीब चार किलोमीटर दूर चला गया। हैरानी की बात यह है कि माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी, लेकिन आरोपित कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था। इसीलिए माता-पिता के शव को सड़क किनारे फेंककर फिर से उनके चेहरे पर ईंट-पत्थर से वार किए गए। पूरी पुष्टि होने के बाद ही आरोपित वहां से गया।
दोनों के चेहरे और छाती पर वार किए गए थे। जिन्हें देखकर लग रहा था कि आरोपित ने कम से कम 20-20 वार तो किए होंगे। आरोपित ने बिल्कुल शातिर अपराधी की तरह वारदात को अंजाम दिया। उसने माता-पिता के शवों को भी पास-पास नहीं फेंका। बल्कि दोनों के शवों में करीब 60 फिट से अधिक की दूरी थी। माना जा रहा है कि इसके पीछे आरोपित की यह मंशा हो सकती है कि अगर उसके माता-पिता ङ्क्षजदा रह गए तो कहीं वह एक-दूसरे की मदद ना कर दें। इसलिए शवों को दूर-दूर फेंका गया।
दोपहर के समय दे दी थी मौत के घाट उतारने की धमकी
आरोपित के मामा हुमायुपुर गांव निवासी राममेहर ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि शनिवार को बहनोई ब्रह्मजीत और भांजा पवन उर्फ बोंदा खरखौदा मंडी में गेहूं बेचने के लिए आए थे। वहां पर राममेहर भी आया हुआ था। वहां पर ब्रह्मजीत और पवन के बीच रुपयों को लेकर कहासुनी हो गई थी। हालांकि उस समय राममेहर ने बीच-बचाव करा दिया था, लेकिन आरोपित ने वहीं पर धमकी दे दी थी कि वह अपने माता-पिता को मौत के घाट उतार देगा। खर्च के लिए रुपये नहीं मिलने पर आरोपित ने हत्याकांड को अंजाम दे डाला। हालांकि उस समय ना तो ब्रह्मजीत को अहसास था कि बेटा ऐसा कृत्य करेगा और ना ही उसके मामा राममेहर को इसका आभास था।
घर पर आकर मिटाए खून के धब्बे, फिर भी नहीं बच सका
दोनों के शवों को फेंकने के बाद आरोपित अपने घर पहुंचा। इसके बाद उसने ट्रैक्टर का पालना धोया, जिस पर खून लगा हुआ था। इसके बाद जहां पर माता-पिता को मौत के घाट उतारा गया वहां पर भी खून को साफ किया गया था, लेकिन आंगन में एक चारपाई पर खून लगा हुआ मिला। इसके बाद आरोपित शिकंजे में आ सका।
ताऊ को बताया सड़क किनारे मरे पड़े हैं माता-पिता, रोने का किया नाटक
आरोपित ने कदम-कदम पर पुलिस और ग्रामीणों को गुमराह करने का प्रयास किया। रात करीब 12 बजे वारदात को अंजाम दिया गया। इसके बाद उनके शवों को फेंका और फिर घर पर आकर सबूत मिटाने का प्रयास किया। दादी चंद्र और दादा श्रीकृष्ण को भी आभास नहीं होने दिया कि उसने इस कृत्य को अंजाम दिया है। सुबह करीब सात बजे खुद ही अपने ताऊ रणबीर के घर पहुंचा। ताऊ को बताया कि उसे कोई बुजुर्ग व्यक्ति मिला था, जिसने बताया कि माता-पिता सड़क किनारे मरे हुए पड़े हैं। इसके बाद सभी लोग वहां पर पहुंचे। आरोपित भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहा और रोने का नाटक भी किया। यहां तक कि वह पुलिस के साथ घर पर भी आया, लेकिन घर आने के बाद उसकी पोल खुल गई।
दादी का मुंह दबाकर कहा जाकर सो जा
रात के समय जब आरोपित ट्रैक्टर लेकर जा रहा था तब उसकी दादी चंद्र की आंख खुल गई। उसने पोते पवन से कहा कि इस समय कहां जा रहा है। जिस पर आरोपित ने कहा कि वह खेत में जा रहा है। दोबारा पूछने पर आरोपित ने अपनी दादी का मुंह दबा दिया और कहा कि चुपचाप जाकर सो जा। हालांकि चंद्र को यह नहीं पता था कि वह अपने माता-पिता का शव लेकर जा रहा है। धमकी के बाद चंद्र भी काफी डर गई और जाकर अपनी चारपाई पर लेट गई।
चार किलोमीटर ले गया शव, नहीं मिली पुलिस
इस पूरे मामले को लेकर हैरानी की बात यह है कि आरोपित ने वारदात को अंजाम दिया। घर में उसके बारे में किसी को पता नहीं चला और दोनों के शव चार किलोमीटर दूर ट्रैक्टर में लेकर चला गया। जबकि लॉकडाउन के दौरान हर चौक-चौराहे पर पुलिस की नाकाबंदी है। इसके बाद भी आरोपित बड़ी आसानी से गया और शव को दूसरे गांव के श्मशानघाट के पास फेंककर भी आ गया, लेकिन कहीं पर भी उसे पुलिस नहीं मिली।
तीन पीढ़ी कर रही देश सेवा
ब्रह्मजीत फौज से रिटायर्ड था, जबकि उसका पिता श्रीकृष्ण भी सेना में रह चुका है। अब ब्रह्मजीत का बड़ा बेटा दीपक नेवी में रहकर देश सेवा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ब्रह्मजीत और उसकी पत्नी बेहद शांत स्वभाव की थी। वह अपने काम से काम रखते थे। ग्रामीण भी यकीन नहीं कर पा रहे कि उनका बेटा ही उन्हें मौत के घाट उतार देगा।
No comments