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बिहार के इस गांव में होती है चमगादड़ की पूजा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्‍ली: दुनिया इस समय कोरोना से जूझ रही है। इससे संक्रमित और मरने वालों लोगों की तादाद में लगातार इजाफा हो रहा है। अभी तक जो जानकारी निकलकर सामने आई है, उसमें विश्व में फैली कोरोना वायरस की पैदाइश चमगादड़ से बताई जा रही है। कहा जाता है कि कोरोना वायरस का प्रकोप चमगादड़ से ही फैलता है, लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग चमगादड़ की पूजा करते हैं।
बिहार के मुजफ्फरपुर से 10 किलोमीटर पूर्व मुशहरी प्रखंड का छपरा मेघ गांव सालों से चमगादड़ों के लिए मशहूर है। लोग इस गांव को (बादुर) यानी चमगादड़ छपरा के नाम से भी जानते हैं। हालांकि किसी को ठीक से नहीं मालूम है कि ये चमगादड़ यहां कब से रह रहीं हैं। यहां भारी संख्या में चमगादड़ों की मौजूदगी बाहरी लोगों के लिए आकषर्ण का केंद्र रहती हैं। यही कारण है कि यहां काफी संख्या में पर्यटक आते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 200 साल पहले यहां एक सिद्ध पुरुष महंत बालादास रहते थे। उन्होंने यहां राम, जानकी और हनुमान का मंदिर बनवाया था। मंदिर के अहाते में स्थित बगीचे के खीरी के पेड़ों पर चमगादड़ों रहते हैं। एक ग्रामीण के अनुसार उन्होंने अपने दादा जी से चमगादड़ों की कहानी सुनी, उसके बाद उनके पिताजी ने उन्हें चमगादड़ के पूजा की बात बताई। पुस्त दर पुस्त छपरा गांव के निवासी चमगादड़ों की पूजा करते चले आ रहे हैं।
पुजारी का चौंकाने वाला दावा
वहीं गांव के मठ के पुजारी ने दावा किया कि ये चमगादड़ रातों को लगभग 70 किलोमीटर चारों तरफ घूमते हैं। जितने क्षेत्रफल में यह चमगादड़ घूमते हैं, वहां तक कोई महामारी नहीं फैलती है।

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