करोड़ों के दान के बीच दुति चंद ने औरतों के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ डोनेट की
लॉकडाउन का सबसे बुरा असर गरीब मजदूरों पर हुआ है. अलग-अलग शहरों में फंसे मजदूर अपने घरों को लौटने लगे हैं. सरकार, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम लोग अपने-अपने स्तर पर इनकी मदद कर रहे हैं. ऐसे में एथलीट दुति चंद भी मदद के लिए आगे आई हैं. लेकिन दुति ने रुपयों या खाने से मदद नहीं की. बल्कि उन्होंने औरतों के लिए सैनिटरी पैड बांटे हैं.
दुति ने ओडिशा के अपने गांव जजपुर में 1000 पैकेट सैनिटरी पैड बांटे हैं. इसमें कंधमाल के एमपी अच्युता समंता और किस फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन विक्रमादित्य ने भी उनकी मदद की है. दुति ने ट्वीट किया,
This car @anandmahindra sir is used for #Covid_19 combat & relief work. Today, I received essential groceries & sanitary from @achyuta_samanta & @dwitivikram & began distributing it in my village.@unwomenindia @KirenRijiju @sports_odisha @IndiaSports @PMOIndia @CMO_Odisha
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इंडियन एक्स्प्रेस से बातचीत में दुति ने कहा कि कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनपर लोग खुलकर बात नहीं करते. माहवारी उनमें से एक है. दुति ने कहा,
”कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए लोगों को हर तरह की मदद की ज़रूरत है. ऐसे में खाना सबसे ज़रूर चीज़ है. लेकिन शायद हम सब भूल रहे हैं कुछ ऐसी चीज़ों की भी लोगों को ज़रूरत है जिसके बारे में कोई खुलकर बात नहीं करता.”
उन्होंने आगे कहा,
”महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सैनिटरी पैड्स बहुत ज़रूरी हैं. लेकिन गांवों में इस वक्त ये सब उपलब्ध नहीं हैं. महिलाएं उनकी कमी के बारे में बात भी नहीं कर पा रही हैं. इतना ही नहीं इस वक्त सैनिटरी पैड खरीदना उनकी क्षमता से बाहर है. क्योंकि उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है और जो भी पैसा उनके पास है, उसका इस्तेमाल वो खाने के लिए कर रहे हैं. सैनिटरी पैड के एक पैकेट की कीमत 50 से 60 रुपये पड़ती है. जबकि गांवों के ज़्यादातर हिस्से में दवाई की दुकानें ही बंद हैं.”
गांवों में महिलाओं को पैड्स किस तरह से बांटे इस पर दुति ने कहा,
”मुझे इस बात का संदेह था कि पता नहीं महिलाएं सैनिटरी पैड लेने में कम्फर्टेबल होंगी या नहीं. इसलिए मैंने हर एक के घर-घर जाकर पैड्स बांटे.”
उन्होंने पैड्स के अलावा राशन का सामान भी बांटा. उन्होंने कहा,
”मैंने उन्हें चावल, चीनी और बाकी रसोई के सामान के साथ सैनेटरी पैड्स भी बांटे. अगर उन्हें सैनेटरी पैड की ज़रूरत है तो उन्हें कम से कम पांच से छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अभी वो कर पाना संभव नहीं है. ऐसे हालात में कोई भी इन लोगों को सैनेटरी पैड्स नहीं बांटने वाला क्योंकि इस वक्त खाना ही प्राथमिकता है.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा,
”हर राज्य के लोगों को ऐसी कोशिश करनी चाहिए कि ये वायरस ना फैले. साथ ही ऐसे में जो लोग सम्पन्न हैं, उन्हें लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए. ओडिशा में मेरी कोशिश है कि लोगों तक सही मैसेज पहुंचे.”
दुति 24 साल की भारतीय प्रोफेशनल स्प्रिंटर हैं. वो महिलाओं के 100 मीटर के इवेंट में नेशनल चैम्पियन भी हैं. समर ओलम्पिक्स के 100 मीटर इवेंट में क्वालीफाई करने वाली वो भारत की सिर्फ तीसरी महिला खिलाड़ी हैं.



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