5.90 फीट लंबे इस अनोखे जीव का चीन के बाजारों में सबसे हाई रेट, 1 लाख रु. में मिलता है 2 KG मांस
नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): चीन में रहने वाले लोगों के भोजन के बारे में अगर बात करें तो यह सभी को पता है कि यहां के लोग जिंदा जीवा को खाने के लिए भी झिझकते नहीं है। चीन में जीव-जंतुओं को खाने की आदत ने चीन से एक जीव को विलुप्ति की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस जीव का उपयोग पारंपरिक चीनी दवाएं बनाने में भी किया जाता है, जबकि इस जीव को लिविंग फॉसिल यानी जीवित जीवाश्म कहा जाता है।
इस अनोखे जीव का नाम चाइनीज जायंट सैलामैंडर है। यह एक बेहद दुर्लभ जीव है। जो चीन के यांग्तजे नदी समेत कई जलस्रोतों में पाया जाता है। हालांकि चीन के अलावा ये उत्तरी अमेरिका और जापान में भी मिलता है, लेकिन सबसे बड़ा चीन का सैलामैंडर होता है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इसे जीवित जीवाश्म इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका इतिहास 17 करोड़ साल पुराना है।
बताया जा रहा है कि यह डायनासोर की प्रजाति से विकसित हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार 1970 में चीन में चाइनीज जायंट सैलामैंडर को लोगों ने खाना शुरू किया। इसके बाद यह लोगों को इतना पसंद आया कि इसकी खपत तेजी से होने लगी।
चीन में एक जायंट सैलामैंडर का दो किलो मांस 1500 डॉलर यानी 1.13 लाख रुपए का मिलता है। अब चीन में इसके फार्म हाउस भी खुलने लगे हैं। ताकि ज्यादा मात्रा में सैलामैंडर का उत्पादन किया जा सके, लेकिन प्राकृतिक तौर पर ये विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके हैं। यह इकलौता एंफीबियंस यानी उभयचर जीव है जो पूरी जिदंगी पानी के अंदर रहता है। जबकि, इसके मछलियों की तरह गिल्स नहीं होते। साइंस के मुताबिक ये जीव अपनी छेद वाली त्वचा से ऑक्सीजन लेते हैं। इनकी आंखें बहुत ताकतवर नहीं होती, लेकिन ये अपने शिकार को पानी में उठने वाली तरंगों से पहचान लेता है।
चीन में पाया जाने वाले जायंट सैलामैंडर करीब 5.90 फीट तक लंबा है। अमेरिका में पाया जाने वाला सैलामैंडर जिसे द हेलबेंडर कहते हैं, वो 28 इंच का होता है। जबकि, जापान में मिलने वाला सैलामैंडर चीन से थोड़ा छोटा होता है। 1970 तक सैलामैंडर चीन के क्विनलिंग पहाड़ों के आसपास मौजूद जलस्रोतों में पर्याप्त मात्रा में थे। इसकी आवाज इंसान के बच्चे के रोने के जैसी थी। इसलिए उस पहाड़ के आसपास रहने वाले लोग इसे खाते नहीं थे। लेकिन दक्षिण चीन के लोग ऐसा नहीं मानते थे। दक्षिण चीन के लोगों ने जब क्विनलिंग पहाड़ों के आसपास से सैलामैंडर को पकड़कर खाने लगे तो इसकी मांग बढ़ती चली गई. इसके सूप, स्टू, जेली आदि बनने लगे. साथ ही इसका चीनी पारंपरिक दवाइयों में उपयोग होने लगा।




No comments