क्या पानी के नीचे मिली द्वारका नगरी से पानी को हटाया जा सकता है? सच्चाई जानिए
द्वारका धाम हिंदू धर्म के चारों धामों में से एक है।यह गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के द्वीप पर स्थित है। इस नगरी का धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। - ऐसी मान्यता है कि मथुरा छोड़ने के बाद अपने परिजनों एवं यादव वंश की रक्षा हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने भाई बलराम तथा यादववंशियों के साथ मिलकर द्वारकापुरी का निर्माण विश्वकर्मा से करवाया था। -यदुवंश की समाप्ति और भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला पूर्ण होते ही द्वारका समुद्र में डूब गई मानी जाती है। इस क्षेत्र का प्राचीन नाम कुशस्थली था। धार्मिक दृष्टि से द्वारका को सप्तपुरियों में गिना जाता है। -वर्तमान में स्थित द्वारका, गोमती द्वारका के नाम से जानी जाती है। यहां आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए आदि शंकराचार्य ने द्वारकापीठ की स्थापना की थी। -आधुनिक खोजों में भी इस क्षेत्र में रेत एवं समुद्र के अंदर से प्राचीन द्वारका के अवशेष प्राप्त हुए हैं। द्वारका की स्थिति एवं बनावट समुद्र के बीच द्वीप पर बने किले के समान है।
द्वारका नगरी से पानी हटाना बहुत मुश्किल है । क्यों कि वो तट से 40 किलोमीटर दूर है और लगभग 120 - 130 फीट गहराई पर है । इस लिए पानी हटाना बहुत मुश्किल है ।
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सरकार के आप को इस से पता चल जाएगा । नदी के मुख्य स्थल से 40 किमी दूर और तापी नदी के मुख्य स्थल के पास अरब सागर के उत्तर-पश्चिम में प्राचीन नगर के अवशेष मिले थे. तब 130 फीट गहराई में 5 मील लंबे और करीब 2 मील चौड़ाई वाला 9 हजार साल पुराना नगर मिला था. मरीन आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ने दो साल की रिसर्च में 1000 नमूने खोजे, जिनमें से 250 पुरात्तव महत्व की अहमियत रखते हैं.

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