रूस और अमेरिका में छिड़ी भारत को लेकर बहस, डीआरडीओ ने दोनों को दिया शानदार जवाब
दोनों देशों के हथियारों के बारे में भारत की क्या राय है यह जानना दिलचस्प है। 25 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह जानकारी दी थी कि सभी ताकतवर देशों के बीच भारतीय सेना, अमेरिकी सेना के साथ सबसे ज्यादा युद्धाभ्यास करती है। लेकिन भारत दुनिया में एक ऐसा देश है जो रूस और अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल एक साथ करता है।
डीआरडीओ का शानदार जवाब
इस बहस के बीच सबसे शानदार जवाब डीआरडीओ (भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान) ने दिया है। डीआरडीओ का कहना है कि भारत परमाणु चालित पनडुब्बी, अंतर महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल, बैलेस्टिक मिसाइल लांच करने वाली पनडुब्बी और एंटी सेटेलाइट मिसाइल तक बनाने में सक्षम है, भारत यह सब विश्व स्तरीय मानकों का बना सकता है। डीआरडीओ का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि निकट भविष्य में भारत हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा और तब उसे ना तो उससे हथियार लेने पढ़ने और ना ही अमेरिका से। भारत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि भारत की सुरक्षा और भारत को हथियार बेचने को लेकर किसी भी देश को बहस करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत हथियारों के निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।
रूस है पहले नंबर पर
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आपको बता दें कि भारतीय सेना के लिए हथियार और सैन्य टेक्नोलॉजी के मामले में रूस पहले स्थान पर है और अमेरिका का स्थान रूस के बाद आता है क्योंकि भारत के अमेरिका के साथ रक्षा संबंध शुरुआती दौर में है। भारतीय रक्षा मंत्रालय का कहना है कि भारत अपने हथियार में विभिन्नता ला रहा है, इसीलिए राफेल फ्रांस से ले रहे हैं तो वही युद्ध करने के लिए हेलीकॉप्टर अमेरिका से और s-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस से ले रहे हैं।
क्या आप डीआरडीओ की बात से सहमत हैं कि कि भारत जल्द ही हथियारों के निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा? अपनी राय कमेंट करके हमें जरूर बताइए और न्यूज़ लाइक व शेयर कीजिए।

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