ठेले पर तरबूज बेचते बच्चे के निकले बेबसी के आंसू, बोला- घर में खाने को नहीं है
अभी तक आपने तमाम लोगों को मेनहत मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते देखा होगा। लाॅकडाउन में तमाम समाज सेवियों को देखा होगा, जो गरीबों की मदद…
शाहजहांपुर: अभी तक आपने तमाम लोगों को मेनहत मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते देखा होगा। लाॅकडाउन में तमाम समाज सेवियों को देखा होगा, जो गरीबों की मदद कर अपने फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन आज हम आपको दो ऐसे मासूम भाई-बहनों को दिखाएंगे, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए ठेले पर तरबूज रखकर बेचने के लिए निकल पड़े। ठेले की ऊंचाई के बराबर इन बच्चों की लंबाई है। उसको खींचकर उस पर रखे तरबूजों को बेचता देखकर अफसोस तो ज्यादातर लोगों ने किया। लेकिन उनकी मदद के लिए अभी तक किसी के हाथ आगे नही बढ़े। जब बच्चे पूछा कि आखिर वह तरबूज क्यों बेच रहे हैं, तब उनकी आवाज तो नहीं निकली लेकिन आंसू जरूर छलक आए। भाई को रोता देखकर बहन के आंसू भी निकलने वाले थे। लेकिन इन तस्वीरों को देखकर अब उन समाजसेवकों, नेताओं और तमाम मदद करने वालों के दावे अब बेईमानी लगने लगे हैं।
ये भी पढ़ें:
बच्चों के पिता हैं बीमार
दरअसल, दिल को झकझोर देने वाली ये तस्वीरें शाहजहांपुर के बीचोंबीच स्थित अंटा के चौराहे के पास के है। दो मासूम भाई-बहन नंगे पैर फटे हुए कपड़े और गंदी हालत में ठेले को खींच रहे थे। उस ठेले पर तरबूज रखे थे। उन तरबूजों को बेचने के लिए मासूम अपनी मासूमियत भरी निगाहों से ग्राहकों की आस लगा रहे थे। क्योंकि इनके घर में खाना नहीं है। इनके पास राशन खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। पिता बीमार हैं। तो अब इन बच्चों के आगे बड़ी मजबूरी है। यही बच्चे पेट भरने के लिए खुद ही कमाने के लिए निकल पड़े। जब ये बच्चे तरबूज बेच रहे थे, तब एक पत्रकार ने इनके वीडियो बनाकर वायरल कर दिये थे। उसके बाद भी इनकी कोई मदद नहीं हो सकी और न ही कोई समाजसेवक सामने आया जो इनकी मदद कर सकता।


No comments