...और चलते चलते ऐसे मर्ग बन गया एक आदमी, कई दिन से चल रहा था पैदल, पसीने से सफेद शर्ट भी हुई मैली

— मुकेश शर्मा
जयपुर। अपने घर पहुंचने की आस लेकर पैदल निकले एक शख्स ने शहर की सड़क पर ही दम तोड़ दिया। वह कहां से आया और कहां जा रहा था यह तो पता नहीं है लेकिन यह तय है कि तेज धूप में लंबे लंबे रास्तों ने उसे निगल लिया। अपने घर पहुंचने के लिए लाखों लोग किस तरह के हालात झेल रहे हैं। जयपुर में गोविंद मार्ग स्थित गुरुद्वारा मोड़ के पास गुरुवार को मिले बुजुर्ग के शव से पूरे हालात बयां हो रहे हैं। बिना नाम, बिना पता का यह आदमी पुलिस रिकॉर्ड में एक मर्ग बनकर दर्ज हो गया। मर्ग यानी पुलिस की जांच में सामान्य मौत। इस बुजुर्ग की मौत भी मर्द है। हालांकि पुलिस कह रही है मरने से पहले यह लावारिस इतना चला होगा कि इसके पैर काले पड़ गए। या यूं कहें कि यह सिर्फ एक लावारिस बुजुर्ग का शव ही नहीं है बल्कि अपने घरों को पैदल ही लौटने के लिए मजबूर हुए लाखों की संख्या में मजदूरों की बेचारगी का दस्तावेज भी है। 174 के तहत मौत के कारण की जांच की जाती है।
जयपुर। अपने घर पहुंचने की आस लेकर पैदल निकले एक शख्स ने शहर की सड़क पर ही दम तोड़ दिया। वह कहां से आया और कहां जा रहा था यह तो पता नहीं है लेकिन यह तय है कि तेज धूप में लंबे लंबे रास्तों ने उसे निगल लिया। अपने घर पहुंचने के लिए लाखों लोग किस तरह के हालात झेल रहे हैं। जयपुर में गोविंद मार्ग स्थित गुरुद्वारा मोड़ के पास गुरुवार को मिले बुजुर्ग के शव से पूरे हालात बयां हो रहे हैं। बिना नाम, बिना पता का यह आदमी पुलिस रिकॉर्ड में एक मर्ग बनकर दर्ज हो गया। मर्ग यानी पुलिस की जांच में सामान्य मौत। इस बुजुर्ग की मौत भी मर्द है। हालांकि पुलिस कह रही है मरने से पहले यह लावारिस इतना चला होगा कि इसके पैर काले पड़ गए। या यूं कहें कि यह सिर्फ एक लावारिस बुजुर्ग का शव ही नहीं है बल्कि अपने घरों को पैदल ही लौटने के लिए मजबूर हुए लाखों की संख्या में मजदूरों की बेचारगी का दस्तावेज भी है। 174 के तहत मौत के कारण की जांच की जाती है।
कई दिन से चल रहा था पैदल
आशंका जताई जा रही है कि बुजुर्ग कई दिनों से पैदल चल रहा था और भूख प्यास व थकान के चलते उसकी जान चली गई। बुजुर्ग राजधानी जयपुर में किसी तरह गुरुद्वारा मोड़ तक तो पहुंच गया, लेकिन यहां पर लाचारी के चलते जिंदगी का सफर हार गया। हुलिए से भिखारी भी नहीं लगता। उसके चेहरे पर अपनों तक पहुंचने की पीड़ा और लंबे सफर की थकान जरूर नजर आती है। आशंका है कि चलने की उम्मीद छोड़ देने पर बुजुर्ग यहां फुटपाथ पर ठहर गया। उसका कुछ सामान भी पुलिस को मिला है जिसमें कुछ बर्तन और एक चटाई भी है।
आशंका जताई जा रही है कि बुजुर्ग कई दिनों से पैदल चल रहा था और भूख प्यास व थकान के चलते उसकी जान चली गई। बुजुर्ग राजधानी जयपुर में किसी तरह गुरुद्वारा मोड़ तक तो पहुंच गया, लेकिन यहां पर लाचारी के चलते जिंदगी का सफर हार गया। हुलिए से भिखारी भी नहीं लगता। उसके चेहरे पर अपनों तक पहुंचने की पीड़ा और लंबे सफर की थकान जरूर नजर आती है। आशंका है कि चलने की उम्मीद छोड़ देने पर बुजुर्ग यहां फुटपाथ पर ठहर गया। उसका कुछ सामान भी पुलिस को मिला है जिसमें कुछ बर्तन और एक चटाई भी है।
पसीने से सफेद शर्ट भी हुई मैली
आशंका यह भी है कि बुजुर्ग कई किलोमीटर पैदल चला। इसके चलते धूप में भी उसने घर तक पहुंचने का सफर चालू रखा। जिससे पसीने से उसकी सफ़ेद चौखाने वाली शर्ट भी मैली पड़ गई। उसने नीले रंग की पैंट पहन रखी है। बुजुर्ग की उम्र करीब 60 वर्ष है। पुलिस मुर्दाघर में शव को रखवा कर उसके परिजनों की तलाश कर रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन-चार दिन से बुजुर्ग को यहां देखा जा रहा था। कोरोना के चलते किसी ने उससे कोई बातचीत भी नहीं की थी। जिसके कारण इसके बारे में कोई नहीं जानता। आसपास वालों ने सूचना भी नहीं दी।
आशंका यह भी है कि बुजुर्ग कई किलोमीटर पैदल चला। इसके चलते धूप में भी उसने घर तक पहुंचने का सफर चालू रखा। जिससे पसीने से उसकी सफ़ेद चौखाने वाली शर्ट भी मैली पड़ गई। उसने नीले रंग की पैंट पहन रखी है। बुजुर्ग की उम्र करीब 60 वर्ष है। पुलिस मुर्दाघर में शव को रखवा कर उसके परिजनों की तलाश कर रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन-चार दिन से बुजुर्ग को यहां देखा जा रहा था। कोरोना के चलते किसी ने उससे कोई बातचीत भी नहीं की थी। जिसके कारण इसके बारे में कोई नहीं जानता। आसपास वालों ने सूचना भी नहीं दी।
No comments