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लटकने से कुछ समय पहले ये थे चारों दरिंदों के हालात कोई रहा था चीख और कोई रहा था चिल्ला


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उन्हें अपने एक एक कृत्य अपनी आँखों के आगे नाचते नजर आ रहे थे. उन्हें इस बात का एहसास था कि उन्होंने बहुत बड़ा अपराध किया था जिसकी सजा वही है जो उनको मिलने जा रही है.. लेकिन मौत का डर ऐसा डर होता है जिसके आगे उन्हें अपने गुनाह कुछ पलों के लिए भूल रहे थे. उन्होंने रोने और गिडगिडाने के साथ ऐसे तमाम जतन किये कि जैसे तैसे वो बच जाएँ लेकिन सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम आर्डर उन्हें आख़िरकार उस अंजाम तक ले गया जिसका इंतजार पूरे देश को लम्बे समय से था.
जब जेल अधिकारियों ने उन्हें अपना नियमित काम खत्म करने और जेल अधिकारियों द्वारा प्रदान किए गए नए कपड़े पहनने के लिए कहा, तो वे सभी टूट गए और जेल कर्मचारियों के चरणों में गिर गए थे. इन दरिंदों के नाम थे- मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर। इन दोषियों को उनके गुनाह की सजा 7 साल 3 महीने और 4 दिन लगातार जेल में रहते हुए मिली थी. इन चारों दोषियों को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में 20 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे फांसी पर लटकाया गया.
चारों दोषियों में विनय फांसी के पहले बहुत रोया और गिड़गिड़ाया. बाकी तीनों दोषी पवन, मुकेश और अक्षय शांत रहे. मुकेश ने मौत के बाद अपने अंगदान करने की इच्छा जाहिर की थी. वहीं, दोषी विनय ने कहा था कि जो मैंने पेंटिंग बनाई हैं वो मेरे घरवालों को दे देना.रात भर जागकर पुलिसकर्मियों से पूछते रहे कि क्या कोर्ट से कोई नया ऑर्डर आया है. चारों दोषियों ने चाय पीने से सुबह मना कर दिया. विनय कह रहा था मैं मरना नहीं चाहता. वह फांसी से पहले बुरी तरह गिड़गिड़िया और कहा, ”मुझे माफ कर दो… मुझे नहीं मरना. जमीन में लेटने लगा.

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