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सवालों के घेरे में उद्धव सरकार, आखिर किस नींद में सोती रही पुलिस

कोरोना से सबसे ज्यादा संक्रमित राज्य महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाकर हजारों मजदूरों के इकट्ठा होने के बाद उद्धव सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।
अंशुमान तिवारी
मुंबई। कोरोना से सबसे ज्यादा संक्रमित राज्य महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाकर हजारों मजदूरों के इकट्ठा होने के बाद उद्धव सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। उद्धव सरकार और मुंबई पुलिस पर कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम न करने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि जब बांद्रा में डेढ़ घंटे से हजारों मजदूरों की भीड़ जुट रही थी तो उस समय आखिर मुंबई पुलिस किस कुंभकरण की नींद में सो रही थी।

शुरुआत में पुलिस ने क्यों नहीं रोका

मंगलवार की शाम को हुई यह घटना वास्तव में उद्धव सरकार और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली है।घटना के बारे में बताया जा रहा है कि मजदूरों की भीड़ शाम साढ़े चार बजे से ही बांद्रा स्टेशन के बाहर इकट्ठा हो रही थी। आखिर जब इतनी भीड़ स्टेशन की ओर बढ़ रही थी तो उस समय पुलिस ने इस भीड़ को रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया। शुरुआत में तो पुलिस ने मजदूरों को समझाने का प्रयास किया मगर नाकाम रहने पर शाम छह बजे पुलिस ने लाठीचार्ज करके मजदूरों को तितर-बितर कर दिया।

मजदूरों में फैली घबराहट

बताया जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के मंगलवार सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन की अवधि को तीन मई तक बढ़ाए जाने के बाद इन मजदूरों में घबराहट फैल गई और वे घर भेजने की मांग करने लगे। रोज कमाने और खाने वाले ये मजदूर लॉकडाउन के कारण पहले ही आर्थिक दिक्कतें झेल रहे हैं। माना जा रहा है कि लॉकडाउन को लंबा खिंचता देखकर उनमें घबराहट फैल गई और वे अपने- अपने घरों को जाने के लिए स्टेशन की ओर भागे। हालांकि बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज करके इन मजदूरों को वापस भेजने में कामयाबी पाई।
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बगल में ही है पुलिस कमिश्नर का दफ्तर

इस घटना के बाद उद्धव सरकार की मुस्तैदी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा नेता प्रेम शुक्ला का कहना है कि यह प्रशासनिक विफलता का सबसे जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हजारों की भीड़ लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाकर स्टेशन पर जमा हो गई मगर पुलिस कुंभकरण की नींद सोती रही। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा अचरज की बात तो यह है कि पुलिस कमिश्नर का दफ्तर भी बगल में ही है। ऐसे इलाके में भी पुलिस का सक्रिय ना होना यह बताता है कि महाराष्ट्र में प्रशासनिक मशीनरी किस तरह काम कर रही है।

मुस्तैदी नहीं दिखा पा रही सरकार

हालांकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे इस घटना के लिए केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ते हैं मगर यह सच्चाई है कि कोरोना को काबू पाने में महाराष्ट्र की सरकार उतना मुस्तैदी से काम नहीं कर पा रही है जितना कि इस वायरस से जंग करने के लिए जरूरी है।

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