ख़ुद को भारतीय बताने की भारतीय मुसलमानों को इतनी बड़ी सज़ा
24 फ़रवरी से भारत की राजधानी नई दिल्ली के उत्तरी क्षेत्रों में मोदी सरकार की नाक के नीचे और पुलिस की निगरानी में हिंदुत्ववादी भगवा चरमपंथियों ने चार दिनों तक जमकर मौतव का तांडव किया और ग़रीब मुसलमानों के घरों और व्यवसायों को जलाकर राख कर दिया।
इस दौरान हिंदुत्ववादियों ने 50 से अधिक मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया और सैकड़ों अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
मुसलमानों के घरों और मोहल्लों पर सुनियोजित हमले किए गए, जिसके बाद से कई मुसलमान युवक तक लापता हैं।
लेकिन मुसलमानों की मुसीबतें सिर्फ़ यहीं ख़त्म नहीं हुईं, बल्कि पुलिस और सरकार का रवैया साफ़ बता रहा है कि यह तो केवल एक शुरूआत है।अब मुसलमानों की धरपकड़ और उनके ख़िलाफ़ झूठे मुक़दमों का ख़त्म नहीं होने वाला एक सिलसिला शुरू हो गया है, जिसे मीडिया इस तरह से उछाल रहा है को मानो इस सबके लिए मुसलमान ख़ुद ही दोषी हैं।
यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि इससे पहले भी जब भी कभी मुस्लिम इबादत गाहों, मोहल्लों या मस्जिदों में आतंकवादी धमाके हुए तो उनका आरोप भी मुस्लिम युवाओं पर ही मढ़ा गया, जबकि इनके पीछे हिंदुत्ववादी संगठनों के हाथ होने की बात अब किसी से ठकी छिपी नहीं है।
अब मुसलमानों को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले नागरिकता के क़ानून सीएए के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की सज़ा दी जा रही है और उनका जनंसाहर करके उन्हें जेलों में ठूसा जा रहा है, ताकि उनके दिलों में ऐसा ख़ौफ़ बैठा दिया जाए कि फिर कभी किसी ज़ुल्म पर आवाज़ नहीं उठा सकें।
लेकिन केवल मोदी सरकार ही नहीं बल्कि दुनिया की हर ज़ालिम ताक़त ने मुसलमानों को समझने में ग़लती की है। मुसलमानों को ख़ून से डराने की कोशिश सबसे बड़ी तारीख़ी भूल है।
मोदी सरकार और पूरा पुलिस तंत्र पुरानी घिसीपिटी चाल चलते हुए सीएए के ख़िलाफ़ जारी धरना प्रदर्शनों को अब दाइश जैसे ख़ूंख़ार आतंकवादी गुट से जोड़ने में लग गए हैं।
लेकिन दिल्ली पुलिस की इस कहानी पर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है। इसलिए कि यह कौन नहीं जानता है कि मोदी सरकार ने धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला क़ानून पारित किया है, जिसका शांतिपूर्ण विरोध करना हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है।
जबकि दुनिया का कोई भी आतंकवादी संगठन हो, वह शांतिपूर्ण विरोध पर विश्वास नहीं रखता है।
सीएए के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का आदर्श बनने वाले शाहीन बाग़ को जब मोदी सरकार और हिंदुत्ववादी संगठन ताक़त के बल पर नहीं कुचल सके तो अब नई साज़िश के तहत पुलिस इन प्रदर्शनों में भूमिका निभाने वालों को आत्मघाती हमलों की साज़िश करने वाले आतंकवादी बताकर पकड़ रही है।
यहां मुसलमानों और हर धर्मनिर्पेक्ष शख़्स को बहुत ही समझदारी से एकजुट होकर मोदी सरकार और पुलिस की इस साज़िश के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी होगी और पूरे देश और संसार के सामने इन साज़िशों का पर्दाफ़ाश करना होगा। क्योंकि इस तरह की साज़िश न केवल मुसलमानों बल्कि देश को तबाह करके रख देगी

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