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घर छोड़कर निकला लड़का…26 वर्ष बाद योगी बनकर लौटा वापस, पूरी कहानी सुनकर आँखों में आ जायंगे आंसू


हजारीबाग के पदमा प्रखंड के सरैया (बांडी सिमर) स्थित घर से 26 वर्ष पूर्व किसी बात से नाराज होकर निकल गया बालक सोमवार को योगी के रुप में भीक्षा मांगने घर पहुंचा। उसके गीतों के माध्यम से पहचान हुई तो परिजनों समेत पूरे गांव की आंखें नम हो गई। भीक्षा मांगने के क्रम में अपनी कहानी गीतों के माध्यम से जब गांव वालों को सुनाया तो मां-पिता भी अपने आप को नहीं रोक सके। परंतु मोह माया से दूर जा चुका बेटे के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई और मां पिता से गुरु के दिए आदेशों के अनुरुप वह भिक्षा लेने के बाद वापस दुबारा वापस आने की बात कह विदा हो गया। योगी बनकर घर आया व्यक्ति बिजय सरैया है। 
चाचा रामचन्द्र महतो सहित अन्य लोगों ने अपने भतीजे को उसके शरीर और चेहरे पर निशानियां देखकर पहचाना। जब 26 साल बाद बेटा को योगी बन गांव लौटने की खबर फैली तो पूरा गांव विजय के घर पर जमा हो गया। अपनी ममता की आंसू पोछते हुए बेटे को मां और पिता ने भिक्षाटन दिया। यह मार्मिक दृश्‍य सबकी गला को रुंद्ध कर दिया। 26 वर्ष पूर्व भाग कर पहुंचा था मुंबई, लूट पाट कर अपराधियों ने कर दिया अधमरा योगी बन चुका विजय ने परिजनों के आग्रह पर बताया कि उसे 26 वर्ष पूर्व वह घर से भागकर मुंबई जा पहुंचा था।
वहां काम करने के बाद उसे लोगों ने रास्ते में लूट लिया और मारपीट कर गंभीर रुप से घायल कर दिया। संभवत: उसे मरा समझकर अपराधी वहां से फरार हो गए होंगे। इसके बाद मां मुम्बा देवी के दर्शन करने जा रहे सन्यासियों के दल ने उसे बचाया, इलाज कराया और घर जाकर माता पिता की सेवा कर गृहस्थ धर्म अपनाने को कहा। परंतु उसके जिद पर उसे गुरु जी ने दीक्षा दी। 12 वर्ष के वैराग्य के दौरान उससे कुछ त्रुटि हो गई, जिस कारण उसे पुन: 12 वर्ष का वैराग्य का निदेश दिया गया।
इसी निदेश पर वह सोमवार को अपने घर भिक्षाटन करने पहुंचा था। बताया कि वह जबतक मां बाप से भिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, उसकी साधनापूरी नहीं होगी। दो वर्ष पूर्व बड़कागांव में भी आया था साधू विजय की तरह बड़कागांव में भी बचपन में लापता हुआ युवक साधू के वेश में पहुंचा था। परिजनों ने उसकी पहचान करने के बाद उसे अपने साथ रहने की जिद की थी। करीब एक सप्ताह रुकने के बाद वह चुपके से एक बार फिर घर से निकल गया था।

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